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झटपट जवाब
ऐसे कोई भरोसेमंद लक्षण नहीं हैं जिन्हें आप घर बैठे पहचान सकें। थकान, बेजान स्किन और बार-बार सर्दी-ज़ुकाम, इन सबकी कई अलग-अलग वजहें हो सकती हैं। हाँ, उम्र बढ़ने, सिगरेट, ज़्यादा शराब, खराब नींद, खराब खान-पान और कुछ लंबी बीमारियों में इसका लेवल अक्सर कम रहता है। अगर लक्षण बने रहें, तो अंदाज़ा लगाने की जगह डॉक्टर को दिखाएँ।
आपको ऐसी ढेरों वेबसाइट मिल जाएँगी जो “ग्लूटाथियोन कम होने के 10 लक्षण” गिनाती हैं, और आखिर में अक्सर कोई सप्लीमेंट बेचती हैं। हम आपसे सीधी बात करना चाहते हैं। लक्षणों की कोई भी लिस्ट यह नहीं बता सकती कि आपका ग्लूटाथियोन लेवल कितना है।
लक्षणों से पता क्यों नहीं चलता
कम ग्लूटाथियोन का संबंध ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से है, जो उम्र बढ़ने और कई लंबी बीमारियों में भूमिका निभाता है। दिक्कत यह है कि लोग आमतौर पर जो लक्षण गिनाते हैं वे किसी एक चीज़ की ओर इशारा नहीं करते, यानी उनकी वजह लगभग कुछ भी हो सकती है।
- थकान या एनर्जी की कमी महसूस होना
- स्किन का बेजान या थका-थका दिखना
- बार-बार सर्दी-ज़ुकाम होना
- ठीक से नींद न आना या तनाव महसूस होना
इनमें से कोई भी चीज़ खून की कमी (एनीमिया), थायरॉइड की दिक्कत, विटामिन D या B12 की कमी, तनाव, या बस पूरी नींद न लेने से हो सकती है। अगर आप इसे “कम ग्लूटाथियोन” मान लेंगे, तो असली वजह छूट सकती है।
ग्लूटाथियोन किन चीज़ों से कम होता है
| वजह | यह क्यों मायने रखती है |
|---|---|
| बढ़ती उम्र | उम्र के साथ लेवल आमतौर पर धीरे-धीरे घटता है |
| सिगरेट पीना | इससे बहुत ज़्यादा ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बनता है |
| ज़्यादा शराब | लिवर पर ज़ोर पड़ता है, जहाँ आपका काफी ग्लूटाथियोन बनता है |
| खराब खान-पान | प्रोटीन, सब्ज़ियाँ या विटामिन C पूरे न मिलना |
| खराब नींद और लंबे समय का तनाव | इनका संबंध ज़्यादा ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से है |
| कुछ बीमारियाँ और दवाइयाँ | कुछ लंबी बीमारियाँ और दवाइयाँ ग्लूटाथियोन को खर्च कर देती हैं, जैसे पैरासिटामोल की ज़्यादा डोज़ |
क्या ग्लूटाथियोन लेवल का टेस्ट हो सकता है?
ग्लूटाथियोन के ब्लड टेस्ट होते तो हैं, लेकिन ज़्यादातर रिसर्च और खास लैब में इस्तेमाल होते हैं, और रूटीन चेक-अप का हिस्सा नहीं होते। सैंपल को कैसे संभाला गया, इससे भी नतीजा बदल सकता है। ज़्यादातर लोगों को इसकी ज़रूरत नहीं होती।
एक बहुत ही दुर्लभ खानदानी बीमारी है, जिसे ग्लूटाथियोन सिंथेटेज़ डेफिशिएंसी कहते हैं। इसकी पहचान और इलाज स्पेशलिस्ट डॉक्टर करते हैं, आमतौर पर बचपन में ही।
अपने नैचुरल ग्लूटाथियोन को सहारा कैसे दें
- ऐसी चीज़ें खाएँ जो मदद करती हैं, जैसे लहसुन, प्याज़, ब्रोकली, पत्तागोभी, पालक, अंडे, दाल, आंवला और मेवे। हमारी ग्लूटाथियोन बढ़ाने वाले खाने की लिस्ट में और भी हैं।
- ज़्यादातर रातों में 7 से 8 घंटे सोने की कोशिश करें।
- सिगरेट न पिएँ, और शराब कम रखें।
- चलते-फिरते रहें। नियमित, हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ शरीर के एंटीऑक्सीडेंट सिस्टम को सहारा देती है।
- सप्लीमेंट के बारे में तभी सोचें जब डॉक्टर सलाह दें। ग्लूटाथियोन की डोज़ के बारे में यहाँ पढ़ सकते हैं।
डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
अगर आप हर समय थका हुआ महसूस करते हैं, बार-बार बीमार पड़ते हैं, बिना कोशिश के वज़न घट रहा है, या हफ्तों से तबीयत ठीक नहीं लग रही, तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाएँ। कुछ आसान ब्लड टेस्ट से ऐसी आम वजहें पकड़ में आ जाती हैं जिनका इलाज आसान है।
आम सवाल
क्या बेजान स्किन का मतलब है कि ग्लूटाथियोन कम है?
ज़रूरी नहीं। धूप, पानी की कमी, खराब नींद और डेड स्किन का जमा होना कहीं ज़्यादा आम वजहें हैं। इस बारे में हमने स्किन के लिए ग्लूटाथियोन में विस्तार से लिखा है।
क्या मुझे “एहतियातन” ग्लूटाथियोन ले लेना चाहिए?
शुरुआत अपने शरीर का ख्याल रखने से करें: अच्छा खाना, पूरी नींद और सिगरेट से दूरी। अगर फिर भी सप्लीमेंट के बारे में सोच रहे हैं, तो पहले अपने डॉक्टर से बात कर लें।
इस गाइड को बनाने वालों की ओर से
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यह लेख सामान्य जानकारी है, मेडिकल सलाह नहीं। अगर आपके लक्षण ठीक नहीं होते, तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाएँ।
यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, मेडिकल सलाह नहीं। कोई भी सप्लीमेंट या ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर या डर्मेटोलॉजिस्ट से बात करें। डिस्क्लेमर · डिस्क्लोज़र



