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डार्क स्पॉट्स, मुंहासों के दाग, टैन और असमान धब्बे, ये सब हाइपरपिगमेंटेशन के ही रूप हैं, यानी स्किन के वे हिस्से जहां ज़्यादा मेलानिन बन गया है। लोग सबसे ज़्यादा जिन चीज़ों की तरफ़ जाते हैं, उनमें ग्लूटाथियोन भी है। यह थोड़ी मदद कर सकता है, खासकर हल्के दागों में।
आपको किस तरह का पिगमेंटेशन है?
- मुंहासों के बाद के दाग (PIH) वे भूरे धब्बे हैं, जो पिंपल ठीक होने के बाद रह जाते हैं। भारतीय स्किन में यह बहुत आम है।
- सन स्पॉट्स सालों तक धूप में रहने से होते हैं।
- टैन वह पूरा सांवलापन है, जो धूप लगने से आता है।
- मेलास्मा (झाइयां) हार्मोन से जुड़ा, धब्बों वाला पिगमेंटेशन है। इस पर हमारी मेलास्मा गाइड में बात की गई है।
- रगड़ से होने वाला पिगमेंटेशन वहां दिखता है, जहां स्किन रगड़ खाती है, जैसे अंडरआर्म्स, जांघों के अंदर और गर्दन पर। देखें अंडरआर्म्स के लिए ग्लूटाथियोन।
क्या ग्लूटाथियोन पिगमेंटेशन में मदद कर सकता है?
कर सकता है। ग्लूटाथियोन एक एंटीऑक्सीडेंट है, और लगता है कि यह स्किन के रंग बनाने के तरीके पर असर डालता है। हालांकि रिसर्च कम है। Dermatology Practical & Conceptual में छपे 2018 के एक रिव्यू को सिर्फ़ छोटी और कम समय की स्टडीज़ मिलीं, और उनके नतीजे भी मामूली थे।
आपके लिए इसका मतलब:
- हल्की बेजान स्किन, टैन और हल्के मुंहासों के दाग में इससे मदद मिलने की सबसे ज़्यादा उम्मीद है।
- जो भी बदलाव आएगा, धीरे आएगा। इसे 8 से 12 हफ़्ते दें।
- दूसरे आज़माए हुए ब्राइटनिंग इंग्रेडिएंट और सनस्क्रीन के साथ यह बेहतर काम करता है।
इसके साथ क्या लगाएं
- विटामिन C स्किन में निखार लाता है और ग्लूटाथियोन को सहारा देता है।
- नियासिनामाइड रंगत को एक जैसा करने और स्किन बैरियर का ख्याल रखने में मदद करता है।
- कोजिक एसिड और आर्बुटिन डार्क स्पॉट्स पर ज़्यादा सीधे काम करते हैं। इनकी तुलना हमने ग्लूटाथियोन बनाम कोजिक एसिड में की है।
- एज़ेलैक एसिड मुंहासों के दाग के लिए अच्छा है। इसे अक्सर डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह पर दिया जाता है।
- SPF 30+ वाला सनस्क्रीन ऐसी चीज़ है जिसे छोड़ नहीं सकते। इसके बिना दाग बार-बार लौटते रहते हैं।
डार्क स्पॉट्स के लिए एक रूटीन
रात में हल्के क्लींज़र से चेहरा धोएं, फिर ग्लूटाथियोन वाली ब्राइटनिंग क्रीम लगाएं।
सुबह चेहरा धोएं, मॉइस्चराइज़र लगाएं और आखिर में SPF 30+ वाला सनस्क्रीन लगाएं। बाहर हों तो दोबारा लगाएं।
कुछ आदतें भी मायने रखती हैं:
- पिंपल को न छेड़ें। छेड़ने से गहरे दाग पड़ते हैं, जो ज़्यादा समय तक रहते हैं।
- पहले चल रहे मुंहासों को काबू में करें। वरना नए दाग बनते ही रहेंगे।
- सख्त स्क्रब से बचें। भारतीय स्किन में जलन से अक्सर पिगमेंटेशन और बढ़ता है।
डर्मेटोलॉजिस्ट को कब दिखाएं
अगर कोई धब्बा बढ़ रहा है, उसका रंग बदल रहा है या उसका आकार टेढ़ा-मेढ़ा है, तो उसकी जांच हमेशा करवाएं।
अगर 3 महीने बाद भी पिगमेंटेशन में सुधार नहीं हुआ है, या आपको मेलास्मा या गहरे धब्बे हैं, तब भी डॉक्टर से मिलें।
हम क्या करेंगे
ग्लूटाथियोन पिगमेंटेशन रूटीन का एक हल्का-सा हिस्सा हो सकता है, बेहतर हो कि कोजिक एसिड, आर्बुटिन और विटामिन C के साथ, और हमेशा सनस्क्रीन के साथ। धीमे और थोड़े सुधार की उम्मीद रखें। अगर कोई धब्बा ज़िद्दी है या बदल रहा है, तो अगला सही कदम डर्मेटोलॉजिस्ट है।
और पढ़ें: मुंहासों के दाग के लिए ग्लूटाथियोन · टैन हटाने के लिए ग्लूटाथियोन · ग्लूटाथियोन बनाम नियासिनामाइड
इस गाइड को बनाने वालों की ओर से
Glutanex ग्लूटाथियोन नाइट क्रीम
इसमें ग्लूटाथियोन के साथ कोजिक एसिड, आर्बुटिन, विटामिन C और पोषण देने वाले तेल हैं, रात के एक ही स्टेप में। पहले पैच टेस्ट ज़रूर करें।
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जानकारी: Glutanex हमारा अपना ब्रांड है। हर किसी के नतीजे अलग हो सकते हैं।
यह लेख सिर्फ़ सामान्य जानकारी के लिए है, मेडिकल सलाह नहीं। कोई भी सप्लीमेंट या ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर या डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लें।
यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, मेडिकल सलाह नहीं। कोई भी सप्लीमेंट या ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर या डर्मेटोलॉजिस्ट से बात करें। डिस्क्लेमर · डिस्क्लोज़र

