नया सेक्शन

टैबलेट और सप्लीमेंट

भारत में ज़्यादातर लोग ग्लूटाथायोन टैबलेट ही खोजते हैं। यहां जानें कि ये किस-किस तरह की होती हैं, स्टडीज़ में कितनी मात्रा ली गई, कब लेनी है, और क्या उम्मीद रखें।

5 गाइड

ग्लूटाथियोन टैबलेट: ये क्या हैं, काम करती हैं या नहीं, और कैसे लें

ग्लूटाथियोन टैबलेट बस वह ग्लूटाथियोन है जिसे आप निगलते हैं। आपका शरीर पहले से तीन अमीनो एसिड से अपना ग्लूटाथियोन बनाता है, तो टैबलेट उसमें थोड़ा और जोड़ती है। भारत में ज़्यादातर प्रोडक्ट में L-ग्लूटाथियोन होता है, अक्सर विटामिन C के साथ, क्योंकि दोनों एंटीऑक्सीडेंट के तौर पर साथ मिलकर काम करते हैं। दुकान पर आपको ज़्यादातर सादे कैप्सूल और टैबलेट, पानी में डालकर घुलने वाली इफ़र्वेसेंट टैबलेट, और लिपोसोमल वर्ज़न दिखेंगे। जीभ के नीचे रखने वाले (sublingual) और S-एसिटाइल वाले रूप भी मिलते हैं, पर उन पर रिसर्च बहुत कम है।

क्या ये काम करती हैं? मुँह से लिए जाने वाले किसी भी ग्लूटाथियोन के साथ बड़ा सवाल है कि शरीर इसे कितना सोख पाता है। पेट के एंज़ाइम इसे खून तक पहुँचने से पहले ही तोड़ सकते हैं, और रिसर्चर सालों तक बहस करते रहे कि इसे निगलने से कुछ खास होता भी है या नहीं। बाद की स्टडीज़ ज़्यादा उम्मीद भरी रहीं: जिन लोगों ने कई महीनों तक इसे रोज़ लिया, उनमें ग्लूटाथियोन का लेवल बढ़ा मिला। स्किन के लिए, कुछ छोटी स्टडीज़ में 8 से 12 हफ़्ते बाद रंगत और दाग-धब्बों में हल्का सुधार दिखा। बदलाव मामूली था, हर इंसान में काफ़ी अलग था, और बंद करने के बाद हमेशा टिकता भी नहीं। जो कोई कुछ ही दिनों में दिखने वाले नतीजों का वादा करे, वह आपको कहानी बेच रहा है।

आप कौन सा टाइप चुनते हैं, इससे नतीजे से ज़्यादा लेने का तरीका बदलता है। इफ़र्वेसेंट टैबलेट लेना आसान है और बहुत से लोगों को वह ड्रिंक पसंद आती है, लेकिन किसी ने यह नहीं दिखाया कि ये अच्छे कैप्सूल से बेहतर सोखी जाती हैं, और झाग बनाने वाली चीज़ों से सोडियम बढ़ता है। लिपोसोमल ग्लूटाथियोन में मॉलिक्यूल को छोटे-छोटे फैट के बुलबुलों में लपेटा जाता है ताकि पेट में वह बचा रहे। छोटी स्टडीज़ (जिनमें से कई का खर्च सप्लीमेंट कंपनियों ने उठाया) बताती हैं कि इससे शरीर में लेवल बढ़ सकता है, कभी-कभी जल्दी भी, लेकिन यह साबित नहीं हुआ कि यह स्किन के लिए ज़्यादा करता है। हर डोज़ के हिसाब से सादे कैप्सूल आमतौर पर सबसे सस्ते पड़ते हैं। लिपोसोमल अक्सर महँगे होते हैं, इसलिए डिब्बे पर लिखे किसी फैंसी शब्द के नहीं, साफ़ लेबल के पैसे दें।

कितना और कब लें। कोई सरकारी रोज़ाना डोज़ तय नहीं है, क्योंकि ग्लूटाथियोन कोई ऐसा विटामिन नहीं जो आपको खाने से लेना ही पड़े। मुँह से लिए ग्लूटाथियोन की स्टडीज़ में ज़्यादातर रोज़ 250 से 1,000 mg इस्तेमाल हुआ, और स्किन वाली स्टडीज़ में रोज़ 250 से 500 mg। इन्हें रिसर्चरों की टेस्ट की गई मात्रा समझें, कोई पर्ची नहीं, और अपने प्रोडक्ट के लेबल के हिसाब से चलें। ज़्यादा लेने से आप जल्दी नहीं निखरेंगे; बस पेट फूलने और पतले दस्त की संभावना बढ़ जाती है। समय की बात करें तो बहुत से लोग इसे खाली पेट लेते हैं, खाने से करीब 30 मिनट पहले या खाने के 2 घंटे बाद। सुबह या रात, दोनों ठीक हैं। ज़रूरी यह है कि आप इसे हर दिन एक ही समय पर, इतने लंबे समय तक लें कि उसे परख सकें।

क्या ये सुरक्षित हैं? स्टडीज़ में लोगों को मुँह से लिया ग्लूटाथियोन आमतौर पर ठीक रहा। आम शिकायतें पेट से जुड़ी होती हैं, जैसे गैस, मरोड़ या पतले दस्त, और एलर्जी कम ही होती है। शुरू करने से पहले डॉक्टर से ज़रूर बात करें अगर आप प्रेग्नेंट हैं या बच्चे को दूध पिलाती हैं, आपको अस्थमा है, आप नियमित दवाएँ लेते हैं (खासकर कीमोथेरेपी), किडनी या लिवर की समस्या है, या आपकी उम्र 18 से कम है। अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर है या आप कम नमक वाली डाइट पर हैं, तो इफ़र्वेसेंट टैबलेट में सोडियम ज़रूर देखें। ऐसे ब्रांड खरीदें जिन पर हर टैबलेट में ग्लूटाथियोन की मात्रा, FSSAI लाइसेंस, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट लिखी हो।

हमारी राय? अगर आपका मकसद निखरी स्किन है, तो रोज़ सनस्क्रीन के साथ ग्लूटाथियोन क्रीम शुरुआत का आसान और कम जोखिम वाला तरीका है, और टैबलेट डॉक्टर से बात करने के बाद ही जोड़ें। और प्लीज़ टैबलेट से सीधे इंजेक्शन पर न जाएँ। CDSCO साफ़ कह चुकी है कि इंजेक्शन वाले प्रोडक्ट कॉस्मेटिक नहीं हैं।

आम सवाल

क्या ग्लूटाथियोन टैबलेट सच में स्किन के लिए काम करती हैं?

थोड़ा, कुछ लोगों में। छोटी स्टडीज़ में 8 से 12 हफ़्ते बाद स्किन थोड़ी निखरी और एक जैसी दिखी, लेकिन लोगों के बीच बड़ा फ़र्क था। स्टडीज़ में क्या मिला, यह जानने के लिए पढ़ें ग्लूटाथियोन टैबलेट पर हमारी हिंदी गाइड।

क्या रोज़ 500 mg ग्लूटाथियोन सुरक्षित है?

स्टडीज़ में लोगों को आमतौर पर इस रेंज की मात्रा ठीक रही। फिर भी पहले अपने डॉक्टर से पूछें, खासकर अगर आपको कोई बीमारी है या आप दवाएँ लेते हैं। देखें ग्लूटाथियोन की डोज़।

ग्लूटाथियोन सुबह लें या रात को?

दोनों ठीक हैं। रात को लें तो डिनर के बाद कम से कम 2 घंटे का गैप रखें। रोज़ एक ही समय पर लेना ज़्यादा मायने रखता है। ज़्यादा जानकारी ग्लूटाथियोन लेने का सबसे अच्छा समय में।

क्या इफ़र्वेसेंट या लिपोसोमल टैबलेट कैप्सूल से बेहतर हैं?

यह साबित नहीं है। इफ़र्वेसेंट से ज़्यादातर बस लेने का तरीका बदलता है, और लिपोसोमल के बेहतर सोखे जाने के कुछ शुरुआती सबूत हैं, लेकिन स्किन पर बेहतर नतीजों के नहीं। हमारी लिपोसोमल गाइड में इनकी तुलना करें।

किन लोगों को डॉक्टर से पूछे बिना ग्लूटाथियोन टैबलेट नहीं लेनी चाहिए?

प्रेग्नेंट या बच्चे को दूध पिलाने वाली महिलाएँ, अस्थमा वाले लोग, नियमित दवाएँ लेने वाले, किडनी या लिवर की समस्या वाले, और 18 साल से कम उम्र का कोई भी। देखें ग्लूटाथियोन के साइड इफ़ेक्ट।